यात्रा
भटके जीव खोजे है ठंड़ी छाँव जीवन गाँव। मन पथिक अनंत मरिचिका फंसे मीन-सा । देती थकन मन की अटकन मिले न थाँव । ईश की याद क्यूँ…
रचना पढ़ें
भटके जीव खोजे है ठंड़ी छाँव जीवन गाँव। मन पथिक अनंत मरिचिका फंसे मीन-सा । देती थकन मन की अटकन मिले न थाँव । ईश की याद क्यूँ…
रचना पढ़ें
तलाशती रही ज़िन्दगी-साथउनके भी साथ ,जो चलते रहे साथ साथ। ख़ामोशी को अक्सरराह का पत्थर समझठोकरे मिलती हैंचशनी में डूबे शब्दजो छलनी भी करेंदर्द रोमान्स…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
कुछ ऐसी, तेरी आदत हो गई मुझे ये कैसी इबादत जो खुद से जुदा कर रही मुझे। दिल की सरहद पे लड़ती हूँ जंग,खुद से…
रचना पढ़ें : क्षणिका
1 बौद्धिकता के ठेकेदार क्या जाने आम आदमी की ठोकरे देते हैँ नारे जलाते वक़्त की धारणनाये खुद को लगाते पँख मिल सके उन्हें,उड़ान दे…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
1 चहकी बया, चौंका शिकारी,अब तेरी है बारी ? 2 रोज रावण रूप बदल सताते आये न राम ? 3 वो आवाज थी जादुई सी,क्योंकर…
रचना पढ़ें : प्रश्न
वक़्त ने खोली अनुभव पिटारी मिली ख़ुशबू। शिशु ख़ुशबू चहकती आँगना गाती तराने। स्वर्ग-नर्क ? ईमानदार लम्हा जीवन अर्क। साँसों में बसे जिन्दगी की मिठास…
रचना पढ़ें : मीठी खुशबू