सीमा स्मृति का रचना संसार

यात्रा

भटके जीव खोजे है ठंड़ी छाँव जीवन गाँव। मन पथिक अनंत मरिचिका फंसे मीन-सा । देती थकन मन की अटकन मिले न थाँव । ईश की याद क्यूँ…

रचना पढ़ें

मन

मन की बातें असीमित अनंत बुझे जो संत। मन के रंग देखो जग के संग नयी तरंग। बदलो सोच ख़ुशी -तितली,आए मन बगिया ।

रचना पढ़ें : मन

संग्रह की और रचनाएँ

शीर्षक रहित रचना

तलाशती रही ज़िन्दगी-साथउनके भी साथ ,जो चलते रहे साथ साथ। ख़ामोशी को अक्सरराह का पत्थर समझठोकरे मिलती हैंचशनी में डूबे शब्दजो छलनी भी करेंदर्द रोमान्स…

रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना

मीठी खुशबू

वक़्त ने खोली अनुभव पिटारी मिली ख़ुशबू। शिशु ख़ुशबू चहकती आँगना गाती तराने। स्वर्ग-नर्क ? ईमानदार लम्हा जीवन अर्क। साँसों में बसे जिन्दगी की मिठास…

रचना पढ़ें : मीठी खुशबू